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विद्युत सम्बन्धी सावधानियाँ एवं विद्युत शॉक लगने पर प्राथमिक उपचार

इस लेख में हम आपसे साझा कर रहे हैं, घरों में विद्युत् सम्बन्धी क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए और यदि किसी को विद्युत् शॉक लगता है तो प्राथमिक उपचार कैसे करें।
electric shock

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आज के आधुनिक युग में हमारे घरो में तमाम तरह के विद्युत् उपकरण होते हैं। लेकिन बिना विद्युत् धारा के सभी विद्युत् उपकरण किसी काम के नही है। हमारे घरो में आमतौर पर 220-230 वोल्ट्स विद्युत् धारा की सप्लाई होती है। विद्युत् के प्रति हमे बिल्कुल भी लापरवाह नही होना चाहिए। यह हमारे लिए जितना ही लाभदायक है, उतना ही खतरनाक भी है। विद्युत् शॉक लगने से व्यक्ति की जान भी जा सकती है। विद्युत् शॉर्टशर्किट होने से घरों में आग लग सकती है।

विद्युत् सम्बन्धी निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए-
घरों की वायरिंग करवाते समय ही हमे विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। वायरिंग करवाते समय यह सुनिश्चित कर ले कि जो भी सामान वायरिंग में लगाया जा रहा है वह 'ISI' मार्क वाले हों। घरो की वायरिंग अच्छे इलेक्ट्रीशियन से करवायें या किसी इलेक्ट्रिक ठेकेदार से वायरिंग करवा रहे हैं, तो ठेकेदार के पिछले किये हुए काम का रिकार्ड देखे।

वायरिंग सम्बन्धी निम्नलिखित ध्यान देने योग्य बांते-
  • छतो की पी.वी.सी. कण्डुटिंग करवाते समय यह देखना चाहिए कि पी.वी.सी. कण्डुट कहीं से टूटे और दबे न, कण्डुट का मुहाना अच्छी तरह से ढका होन चाहिए ताकि कण्डुट में सीमेंट मसाला न जा सके। अगर ऐसा हुआ तो वायरिंग का काम बढ़ जाता है, और तार डालने में समस्या आती है। यह देख लेना चाहिए कि कण्डुटिंग रुट सही है। सही रुट के लिए किसी इंजीनियर से आप सलाह ले सकते हैं।
  • दीवारो की कण्डुटिंग करवाते समय स्विच बोर्ड में लूपिंग और इन शुर्किट के लिए अलग-अलग कण्डुट लगे हों। TV केबल, टेलीफोन तार के लिए अलग से कण्डुट  लगा होना चाहिए।
  • तार डलवाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी कण्डुट में झमता से अधिक तार तो नही डाला जा रहा है। अगर ऐसा हुआ तो शर्किट गर्म होकर पिघल सकती हैं और शॉर्टशर्किट हो सकता है। पी.वी.सी. कण्डुट के अंदर जुड़े हुए तार नही डलवाना चाहिए।
  • इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए की शर्किट के लिए जो तार डाला जा रहा है, वह सम्बंधित उपकरण के विद्युत् खपत की झमता से तार की झमता अधिक हो। किसी शर्किट को झमता से अधिक लूपिंग न किया गया हो।
  • MCB की झमता घर में प्रयुक्त एम्पियर  की झमता से बहुत अधिक नही होनी चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो शार्ट शर्किट होने पर MCB नही गिरेगी।
  • प्रत्येक स्विच-शॉकीट बोर्ड में अच्छी तरह से अर्थिंग की गई हो। जिस उपकरण में अर्थिंग की जरूरत हो वहाँ अर्थिंग की गई हो।
  • उपकरण इंस्टालेशन के समय यह ध्यान देना चाहिए कि विद्युत सप्लाई तार को अच्छी तरह से स्क्रू से कसा हो।
  • यदि कहीं तार कण्डुट से बाहर दिख रहा हो तो उसे फ्लेक्सिबल से ढक देना चाहिए।
अगर आप फ्लैट खरीद रहे हैं तो वायरिंग सम्बन्धी उपरोक्त बातों का पड़ताल कर ले।


विद्युत उपकरणों के प्रयोग के समय तथा रख-रखाव के समय सुरक्षा नियमो का पालन करके सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है।

घरों में विद्युत उपकरण उपयोग करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए-
  • विद्युत उपकरणों से छेड़छाड़ नही करना चाहिए।
  • किसी भी विद्युत उपकरण की लचकदार  तार को खींचकर सप्लाई से अलग न करें।
  • किसी उपकरण का तार यदि कटा हो तो उसे अच्छी तरह जोड़कर पी.वी.सी. टेप लपेट देना चाहिए। 
  • सभी धातु से बनी वस्तुएं विद्युत बहने वाले चालक को छोड़कर अच्छी तरह से अर्थिन्ग होनी चाहिए।
  • उपकरणों के पॉवर सप्लाई केबल में तीन पिन वाला प्लग टॉप ही प्रयोग करना चाहिए क्योंकि इसमें अर्थ कनेक्शन की व्यवस्था रहती है।
  • किसी उपकरण को खोलते समय उसे विद्युत सप्लाई से अलग कर देना चाहिए।
  • स्विच बोर्ड में प्लग लगते समय चप्पल पहने रखें।
  • गीले हांथो से कभी भी प्लग न लगाएं न ही स्विच दबाएं।
  • तार को कभी भी दबाव पड़ने वाले स्थान से न ले जाएँ।
विद्युत् शॉक लगने पर प्राथमिक उपचार-
  • जब कोई व्यक्ति विद्युत सम्पर्क में हो तो उसे बाजू से खींचकर अलग न करें ऐसा करने से दूसरा व्यक्ति भी विद्युत सम्पर्क में आ सकता है।
  • जब कोई व्यक्ति विद्युत सम्पर्क में हो तो उसे प्लास्टिक की छड़ या सूखी लकड़ी से धकेल देना चाहिए या किसी इंसुलेटर जैसे- सूखे कपड़े से अपने आप को पूरी तरह से इन्सुलेटिड करके उसे खींचना या धकेलना चाहिए। अगर आप स्विच के पहुँच में हो तो तुरन्त स्विच बन्द कर दे।
  • तुरन्त डॉ. को सूचित करें।
  • यदि जरूरत हो, तो डॉ. के आने से पहले कृतिम साँस दिलाने की कोशिश करें।
  • बेहोशी की अवस्था में रोगी को कोई भी पेय पदार्थ न दें।
  • रोगी दोबारा साँस लेना शुरू कर दे तो कुछ और देर कृतिम साँस देते रहें।
कृतिम सांस देने के तरीके ।
आमतौर पर कृतिम सांस देने के तीन तरीके होते हैं।
1. नैल्सन विधि
2. शैफर्स विधि
3. मुह से नाक विधि

1. नैल्सन विधि - नैल्सन विधि तब प्रयोग की जाती है जब रोगी का अग्रिम भाग जल जाता है। इस विधि में सर पीछे होना चाहिए, रोगी का मुह खोलो और जीभ बाहर निकालो, उसके कन्धों के नीचे तकिया रख दे ताकि उसका सर पीछे की और थोड़ा सा लटक सके। कोहनी से जरा नीचे बाजू  पकड़ कर सर के ऊपर तक खींचे जब तक की वह समतल अवस्था में न हो जाये और दो सेकण्ड तक बाजू समतल अवस्था में रखें। इस प्रक्रिया को 1 मिनट में पन्द्रह बार करें।

2. शैफर्स विधि - रोगी के दोनो हाँथ पीठ पर रखते हुए (उँगलिया फैली हों तथा अंगूठे एक दूसरे को छूते हों) अब रोगी ऊपर आगे की ओर झुकते हुए, धीरे-धीरे दबाव डालें। इसे 1 मिनट में 15 बार करें और तब तक करें जब तक डॉ. न आ जायें।

3. मुह से नाक विधि - नैल्सन विधि की भांति उसे छाती ऊपर की ओर रखते हुए लिटा दो। ताजी हवा में गहरी साँस लो और रोगी के नाक में फूंक मारो। यह प्रक्रिया 1 मिनट में कम से कम 12 बार करें।

इस लेख में आप हमारी और मदद कर सकते हैं।
धन्यवाद!

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